भाग 1: प्रारंभिक भक्ति परंपरा एवं पूजा प्रणालियों का समन्वय भाग 2: भेद, संघर्ष और तांत्रिक पद्धति भाग 3: तमिलनाडु के अलवार और नयनार संत भाग 4: दक्षिण की स्त्री भक्त और राज्य से संबंध भाग 5: कर्नाटक की वीरशैव / लिंगायत परंपरा भाग 6: उत्तर भारत में धार्मिक उफ़ान और नए विकास भाग 7:…
आज के प्रमुख प्रश्न-५ (यात्रियों के नज़रिए)
भाग 1: अल-बिरूनी और ‘किताब-उल-हिन्द’ 1. अल-बिरूनी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?उत्तर: अल-बिरूनी का जन्म सन् 973 में आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख्वारिज्म में हुआ था। 2. ख्वारिज्म किस चीज़ का एक महत्वपूर्ण केंद्र था?उत्तर: शिक्षा का। 3. अल-बिरूनी को कौन-कौन सी भाषाओं का ज्ञान था?उत्तर: सीरियाई, फ़ारसी, हिब्रू तथा संस्कृत। 4. क्या…
आज के प्रमुख प्रश्न-४ (हड़प्पा सभ्यता: विचारक, विश्वास और इमारतें)
भाग 1: साँची का स्तूप और भोपाल की बेगमों का योगदान भाग 2: वैदिक परंपरा, यज्ञ और उपनिषद भाग 3: जैन धर्म और महावीर के संदेश भाग 4: महात्मा बुद्ध और बौद्ध ग्रंथों का निर्माण भाग 5: बौद्ध संघ, स्तूप और वास्तुकला भाग 6: लोक परंपराएँ, महायान और पौराणिक हिंदू धर्म
आज के प्रमुख प्रश्न – 3 (हड़प्पा सभ्यता: बंधुत्व, जाति तथा वर्ग)
आज के प्रमुख प्रश्न – २ (हड़प्पा सभ्यता: ईंटें, मनके और अस्थियाँ)
हड़प्पा सभ्यता: परिचय, तिथियाँ और विस्तार प्रश्न: हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट पुरावस्तु क्या है?उत्तर: हड़प्पाई मुहर। प्रश्न: हड़प्पाई मुहरें मुख्य रूप से किस पत्थर से बनाई जाती थीं?उत्तर: सेलखड़ी (Steatite) पत्थर से। प्रश्न: हड़प्पा सभ्यता को अन्य किस नाम से जाना जाता है?उत्तर: सिंधु घाटी सभ्यता। प्रश्न: इस सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा’ क्यों पड़ा?उत्तर:…
आज के प्रमुख प्रश्न – १ (हड़प्पा सभ्यता – राजा, किसान और नगर)
भाग 1: अभिलेखशास्त्र और लिपियों का इतिहास भाग 2: महाजनपद काल और मगध का उत्कर्ष भाग 3: मौर्य साम्राज्य और उसका प्रशासन भाग 4: राजधर्म के सिद्धांत, कुषाण और गुप्त साम्राज्य भाग 5: बदलता हुआ देहात, कृषि तकनीक और भूमिदान भाग 6: नगर, व्यापार और सिक्कों का इतिहास
अभिलेख
1. अभिलेख क्या होते हैं? (What are Inscriptions?) 2. अभिलेखों में क्या लिखा जाता था? (What was written?) 3. इनका समय (Date) कैसे पता चलता है? 4. ये किस भाषा में लिखे जाते थे? (Languages Used)
प्रत्यायोजित विधायन, सबसे प्रभावी नियंत्रण कौन सा है?
प्रत्यायोजित विधायन (Delegated Legislation) आधुनिक शासन व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है। जब संसद या विधायिका किसी कानून की केवल मुख्य रूपरेखा (Skeleton) तैयार करती है और उसके विस्तार, नियम या उप-नियम बनाने की शक्ति कार्यपालिका (सरकार) को सौंप देती है, तो इसे ‘प्रत्यायोजित विधायन’ कहते हैं। सरल शब्दों में, इसे ‘अधीनस्थ विधान’ भी कहा…
शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत, विकास के कारण एवं महत्व
शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत (Theory of Separation of Powers) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक मूल आधार है। इसका सरल अर्थ है कि सरकार की शक्तियों को किसी एक व्यक्ति या संस्था में केंद्रित करने के बजाय उन्हें अलग-अलग अंगों में बाँट देना। शक्ति पृथक्करण का अर्थ इस सिद्धांत के अनुसार, सरकार के तीन मुख्य अंग…
शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत
शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत (Doctrine of Separation of Powers) आधुनिक लोकतंत्र का एक आधारभूत स्तंभ है। इस सिद्धांत का मुख्य प्रतिपादक फ्रांसीसी दार्शनिक मान्टेस्क्यू (Montesquieu) को माना जाता है, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘द स्पिरिट ऑफ लॉज’ (1748) में इसका विस्तार से वर्णन किया था। सिद्धांत का मूल अर्थ शक्ति पृथक्करण का अर्थ है कि राज्य…